
लक्ष्मी विषकन्या
दोष निवारण महापूजा
"जहाँ माँ की कृपा है, वहाँ कोई दोष नहीं ठहरता।"
एक प्राचीन, गुप्त एवं अत्यंत प्रभावशाली अनुष्ठान — जीवन के अदृश्य बंधनों को काटने वाला।
यह महापूजा क्या है?
लक्ष्मी विषकन्या दोष निवारण महापूजा माँ पीताम्बरा बगलामुखी मंदिर में संपन्न होने वाला एक अत्यंत दुर्लभ एवं दिव्य साधना है, जो केवल सिद्ध योगियों एवं गुरु परंपरा के सान्निध्य में संपन्न कराया जाता है। इस अनुष्ठान की प्रमुख विशेषता “सहस्रधारा पात्र अभिषेक” है, जिसमें प्राचीन बावड़ियों एवं पवित्र कुओं के दिव्य जल से साधक का अभिषेक कर आध्यात्मिक शुद्धिकरण एवं दोष निवारण किया जाता है।
शास्त्रों में "विषकन्या दोष" उस ऊर्जा को कहा गया है जो स्पर्श मात्र से सम्बन्धों, धन एवं स्वास्थ्य पर विष-तुल्य प्रभाव डालती है। यह महापूजा उसी विष को अमृत में परिवर्तित करने का संकल्प है।
अनुष्ठान से पूर्व साधक की कुंडली, ग्रह स्थिति एवं दोषों का गहन अध्ययन कर विशेष मंत्र, साधना एवं हवन प्रक्रिया निर्धारित की जाती है।मान्यता है कि यह दिव्य साधना केवल लक्ष्मी विषकन्या दोष ही नहीं, बल्कि मंगल दोष, कालसर्प दोष, पितृ दोष, ऋण दोष एवं अन्य अनेक आध्यात्मिक बाधाओं की शांति हेतु भी अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है।


यह पूजा कौन - से कष्ट दूर करती है?
जब कारण अदृश्य हो — समाधान भी दिव्य ही होता है।
लक्ष्मी कृपा एवं आर्थिक स्थिरता
धन प्रवाह में वृद्धि, आर्थिक संतुलन एवं जीवन में स्थिरता का अनुभव।
विषकन्या दोष शांति
लक्ष्मी विषकन्या दोष से उत्पन्न बाधाओं एवं नकारात्मक प्रभावों की शांति।
मंगल दोष शांति
वैवाहिक विलम्ब, कलह एवं मंगल दोष से जुड़ी समस्याओं का निवारण।
कालसर्प दोष निवारण
ग्रह पीड़ाओं, रुकावटों एवं जीवन में बार-बार आने वाली बाधाओं की शांति।
पितृ दोष शांति
पूर्वजों से संबंधित दोषों की शांति एवं पारिवारिक संतुलन की प्राप्ति।
नागवाली एवं ऋण दोष मुक्ति
ऋण, नागवाली दोष एवं जीवन की आर्थिक-अध्यात्मिक बाधाओं से राहत।
वैवाहिक एवं पारिवारिक सुख
दांपत्य जीवन में मधुरता, परिवार में शांति एवं संबंधों में सामंजस्य।
नकारात्मक ऊर्जा निवारण
घर एवं जीवन से अशुभ ऊर्जा, भय एवं आध्यात्मिक बाधाओं की शांति।
मानसिक शांति एवं आत्मबल
मन की स्थिरता, आत्मविश्वास एवं सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि।
जीवन में स्थिरता एवं सफलता
कार्य, व्यवसाय एवं व्यक्तिगत जीवन में निरंतर प्रगति एवं सफलता।

यह महापूजा कैसे की जाती है?
शास्त्रों के अनुसार, चरण-दर-चरण — एक पवित्र यात्रा।
- १
संकल्प एवं शुद्धि
साधक का संकल्प, गोत्र-नाम उच्चारण, गंगाजल एवं पंचगव्य से देह तथा स्थान की शुद्धि।
- २
गणेश एवं नवग्रह पूजन
विघ्नहर्ता गणेश, मातृका, कलश एवं नवग्रहों का आह्वान — अनुष्ठान की नींव।
- ३
माँ बगलामुखी मूल मंत्र जप
१,२५,००० बगलामुखी मूल मन्त्र जप — स्तम्भन शक्ति का जागरण, शत्रु-दोष का स्तम्भन।
- ४
लक्ष्मी सूक्त एवं श्री सूक्त पाठ
अष्टलक्ष्मी आह्वान — धन, सौभाग्य, स्थिरता एवं समृद्धि की कृपा का संचार।
- ५
विषकन्या दोष निवारण विशेष होम
हल्दी, पीली सरसों, गुग्गुल एवं औषधि-समिधा से विशेष आहुतियाँ — दोष का दहन।
- ६
सहस्रधारा अभिषेक एवं पूर्णाहुति
माँ का दुग्ध-घृत-मधु से अभिषेक, पूर्णाहुति, आरती एवं प्रसाद वितरण।

आचार्य एवं अनुष्ठान-कर्ता
परम पूज्य संत स्वामी
श्री विजयानंद पुरी जी महाराज
श्री पंचायती महानिर्वाणीअखाड़ा
केवल पूज्य स्वामी जी के
कर-कमलों से
यह दिव्य महापूजा माँ बगलामुखी मंदिर, उज्जैन में परम पूज्य संत स्वामी श्री विजयानंद पुरी जी महाराज के मार्गदर्शन एवं प्रत्यक्ष सान्निध्य में ही सम्पन्न की जाती है।
वर्षों की कठोर साधना, गुरु परम्परा एवं सिद्धि के बल पर पूज्य स्वामी जी इस गुप्त अनुष्ठान को शास्त्र-सम्मत विधि से सम्पन्न कराते हैं — जिससे साधक को पूर्ण फल की प्राप्ति होती है।
माँ की कृपा एक बार पुकारिए
"जो माँ के द्वार आया, वो खाली नहीं लौटा।"
अनुष्ठान, मुहूर्त एवं संकल्प की जानकारी हेतु मंदिर परिसर में पधारें अथवा संपर्क करें।

